PMVKSY बिल्कुल FREE में सुपरस्टार बनो – PM Vishwakarma Yojana Ka Power (PMVKSY) 2026

PMVKSY
PMVKSY

PMVKSY is set to revolutionize the skills landscape in India.

Through PMVKSY, artisans are discovering new horizons in their craftsmanship.

The PMVKSY initiative empowers local craftsmen with modern techniques and training.

With PMVKSY, the future of traditional artisans looks bright.

PMGC

The financial support through PMVKSY is transforming lives.

Products made under PMVKSY are gaining global recognition.

With support from PMVKSY, skills are being recognized globally.

PMVKSY ensures artisans are proud of their heritage and craft.

The PMVKSY program is a beacon of hope for future generations.

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना देश के उन लाखों हाथों के लिए एक नया सवेरा लेकर आई है जो सदियों से लकड़ी, लोहा, मिट्टी, सोना-चांदी और पत्थर को अपने हुनर से जीवंत बनाते आए हैं। बढ़ई की छेनी, लोहार की हथौड़ी, कुम्हार का चाक, सुनार की भट्टी और मोची की सुई अब सिर्फ रोजी-रोटी का साधन नहीं रह गईं, बल्कि ये आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बनने जा रही हैं। यह योजना पारंपरिक शिल्पकारों को सम्मान के साथ-साथ आधुनिकता की रोशनी भी दे रही है ताकि उनका कौशल नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने और उनका व्यवसाय आने वाले समय में भी फलता-फूलता रहे।

इस योजना के तहत कारीगरों को सबसे पहले अपने हुनर को निखारने का मौका मिलता है। गांव-कस्बों में चलने वाले प्रशिक्षण शिविरों में उन्हें नए डिज़ाइन, आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल और बेहतर फिनिशिंग की बारीकियां सिखाई जाती हैं। प्रशिक्षण के दौरान उनकी जेब भी खाली नहीं रहती, हर दिन पांच सौ रुपये सीधे उनके खाते में आते हैं। यह छोटी-सी राशि उनके लिए बहुत बड़ी होती है क्योंकि कई बार घर चलाने के लिए वे अपना औजार तक गिरवी रख देते थे। अब प्रशिक्षण के साथ-साथ उनकी रोज़मर्रा की जरूरतें भी पूरी हो रही हैं।

प्रशिक्षण के बाद हर कारीगर को पंद्रह हज़ार रुपये तक के आधुनिक औजार मुफ्त मिलते हैं। ये औजार अब पुराने हथौड़े-छेनी की जगह ले रहे हैं। बिजली से चलने वाली मशीनें, डिजिटल मापक यंत्र और सुरक्षित उपकरण उनके काम को तेज़, सटीक और कम मेहनत वाला बना रहे हैं। एक बढ़ई अब पहले की तुलना में आधे समय में दोगुनी खूबसूरत अलमारी बना लेता है, कुम्हार के बर्तन अब एकसमान और चमकदार बनते हैं। ये औजार उनके आत्मविश्वास की तरह चमक रहे हैं।

सबसे बड़ी राहत तो कर्ज की है। पहले कारीगरों को सूदखोरों के चंगुल में फंसना पड़ता था। अब सरकार बिना कुछ गिरवी रखे, सिर्फ पांच प्रतिशत ब्याज पर एक लाख रुपये तक का पहला कर्ज देती है। जब वह इसे चुका देता है तो दूसरी बार दो लाख रुपये तक मिल जाते हैं। यह पैसा नया कारखाना खोलने, कच्चा माल खरीदने या दुकान सजाने में लग रहा है। अब मोहल्ले का लोहार छोटी-सी वर्कशॉप चला रहा है, सुनार नए डिज़ाइन बनाने के लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर खरीद रहा है और दर्जी अपनी दुकान पर ब्रांडेड नाम लिखवा रहा है।

योजना सिर्फ पैसे और औजार तक सीमित नहीं है। कारीगरों के उत्पाद अब सीधे देश-दुनिया के बाज़ार तक पहुंच रहे हैं। उनके बनाए बर्तन, फर्नीचर, गहने और जूते अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक रहे हैं। सरकार उन्हें पैकेजिंग सिखा रही है, ब्रांड नाम बनाने में मदद कर रही है और प्रदर्शनी में जगह दे रही है। अब गांव की कुम्हारिन के दीये दिल्ली के बड़े शोरूम में सजते हैं और राजस्थान के लोहार का बना लोहे का हिरण विदेशी पर्यटकों को बहुत पसंद आ रहा है।

यह योजना साबित कर रही है कि जब PMVKSY और शिल्पकार साथ चलें तो भारत एक बार फिर विश्व की गुरु बन सकता है।


प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना सिर्फ़ एक सरकारी स्कीम नहीं, कारीगरों के लिए नया सवेरा है। जहाँ पहले हुनर था पर सम्मान कम था, आज FREE ट्रेनिंग, FREE टूलकिट और FREE-जैसा सस्ता लोन उस हुनर को चमका रहा है। गाँव का लोहार, कुम्हार, बढ़ई अब सिर्फ़ मेहनत नहीं, सपने भी बेच रहा है। यह योजना हमारी प्राचीन शिल्प-परंपरा को बचाते हुए उसे ग्लोबल ब्रांड बना रही है। अब कारीगर का बेटा कहता है – “पापा का काम छोड़ूँगा नहीं, उसे Next Level पर ले जाऊँगा!” यही है असली आत्मनिर्भर भारत – जब PMVKSY के हाथों में ताकत आएगी, तब भारत फिर विश्वगुरु बनेगा। जय हिंद, जय विश्वकर्मा! 🙏🔥

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