PMAY-G FREE में पक्का मकान + शौचालय + बिजली – ये है PMAY-G का जादू 2026

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PMAY-G भारत के गाँवों में आज भी लाखों परिवार कच्चे मकान, टूटती दीवारों और फूस की छत के नीचे जीवन गुज़ारते हैं। बारिश में पानी टपकता है, सर्दियों में ठंड और गर्मियों में गर्मी असहनीय हो जाती है। इस दर्द को समझते हुए केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) शुरू की। इसका एक ही लक्ष्य था – वर्ष 2024 तक ग्रामीण भारत के हर बेघर और कच्चे मकान में रहने वाले गरीब परिवार को पक्का, सुरक्षित और सम्मानजनक घर उपलब्ध कराना। आज नवंबर 2025 में हम देख रहे हैं कि यह योजना सचमुच ज़मीनी स्तर पर क्रांति ला रही है।PMAY-G

PMAY-G has significantly transformed the housing landscape in rural India, providing families with solid homes, sanitation facilities, and electricity. This initiative addresses the dire conditions faced by many, ensuring that by 2026, every eligible household can enjoy a dignified living environment. The government’s commitment to this program is evident in its ongoing efforts to uplift the living standards of rural communities, fostering both safety and stability. As we move forward, the impact of PMAY-G truly exemplifies the promise of a better tomorrow for countless families.

इस योजना के तहत सबसे गरीब से गरीब परिवार को प्राथमिकता दी जाती है। SECC-2011 के आंकड़ों और बाद के सर्वे के आधार पर लाभार्थियों की सूची तैयार की गई है। इसमें अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक समुदाय, महिला प्रधान परिवार, दिव्यांगजन, आज़ादी के सैनानियों के परिजन और अत्यंत गरीब परिवार शामिल हैं। जिसका नाम लिस्ट में है या जो “आवास प्लस” सर्वे में आया है, उसे घर मिलना तय है। सरकार ने वादा किया था कि कोई भी पात्र परिवार छूटेगा नहीं।PMAY-G

वित्तीय सहायता की बात करें तो मैदानी क्षेत्रों में एक घर के लिए 1 लाख 20 हज़ार रुपये और पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में 1 लाख 30 हज़ार रुपये सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT के ज़रिए आते हैं। यह राशि तीन-चार किस्तों में दी जाती है। इसके अलावा मनरेगा से 90-95 दिन की मज़दूरी (लगभग 18-20 हज़ार रुपये) और स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय के लिए अलग से 12 हज़ार रुपये मिलते हैं। इस तरह एक परिवार को कुल 1.80 लाख से 2 लाख रुपये PMAY-Gतक की मदद आसानी से मिल जाती है। कई परिवार थोड़ा अपना योगदान जोड़कर और भी बेहतर मकान बना लेते हैं। PMAY-G

How PMAY-G is Redefining Rural Housing

The Impact of PMAY-G on Rural Housing Development

घर का डिज़ाइन भी सरकार ने सोच-समझकर तय किया है। न्यूनतम 25 वर्ग मीटर का कार्पेट एरिया अनिवार्य है। इसमें स्वच्छ शौचालय, रसोई, बिजली कनेक्शन और पीने का साफ पानी होना ज़रूरी है। भूकंप प्रतिरोधी तकनीक का पालन करना पड़ता है। सौर लाइट, धुआं रहित चूल्हा और रेन वॉ65र हार्वेस्टिंग जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाता है। लाभार्थी अपने हिसाब से डिज़ाइन चुन सकता है, बस तयशुदा मापदंड पूरे करने होते हैं। नतीजा यह है कि गाँवों में अब सुंदर, मजबूत और आरामदायक मकान दिखने लगे हैं।PMAY-G

तकनीक का इस योजना में कमाल का इस्तेमाल हुआ है। AwaasSoft पोर्टल और AwaasApp के ज़रिए हर घर की प्रगति को लाइव देखा जा सकता है। हर किस्त के लिए Geo-tagged फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। लाभार्थी खुद मोबाइल से फोटो खींचकर डालते हैं और अधिकारी ऑनलाइन वेरिफाई करते हैं। पैसे का गलत इस्तेमाल या भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी को देखते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर सहायता केंद्र और सीएससी सेंटर्स की बड़ी भूमिका रही है।PMAY-G

अब तक के आंकड़े गर्व करने लायक हैं। अप्रैल 2016 से नवंबर 2025 तक देश भर में लगभग 2.95 करोड़ घरों को स्वीकृति मिल चुकी है और इनमें से 2.55 करोड़ से ज़्यादा घर पूरे होकर परिवारों को सौंपे जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्य सबसे आगे हैं। कई गाँव तो ऐसे हैं जहाँ अब एक भी कच्चा मकान नहीं बचा। लोग कहते हैं, “पहले छत टपकती थी, अब सिर ऊँचा करके जीते हैं।”PMAY-G

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महिलाओं के नाम पर घर होना इस योजना की सबसे खूबसूरत बात है। ज़मीन या तो महिला के नाम पर हो या पति-पत्नी दोनों के संयुक्त नाम पर। इससे गाँव की महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा दोनों मिली है। बच्चे अब बारिश में किताबें खराब होने की चिंता से मुक्त हैं। बुजुर्ग ठंड से बच रहे हैं। कुल मिलाकर एक घर ने पूरे परिवार की ज़िंदगी बदल दी है।PMAY-G

कुछ चुनौतियाँ भी रहीं। कई जगहों पर ज़मीन का मालिकाना हक साफ नहीं था, कुछ लोग प्रवासी थे, तो कुछ इलाकों में मज़दूरों की कमी हुई। लेकिन सरकार ने इन सबके लिए अलग-अलग समाधान निकाले। अब तो राज्य सरकारें और जिला प्रशासन आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं कि उनका जिला सबसे पहले 100% लक्ष्य पूरा करे।PMAY-G

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, यह ग्रामीण भारत के आत्मसम्मान और विकास की मज़बूत नींव है। जब गाँव का हर घर पक्का होगा, तब ही सचमुच हम कह सकेंगे कि भारत ने गरीबी को सिर्फ कागज़ों पर नहीं, ज़मीनी हकीकत में हराया है। यह योजना उस स्वर्णिम भारत की ओर एक मजबूत कदम है जहाँ हर नागरिक के सिर पर पक्की छत और मन में गर्व हो।PMAY-G

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